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shaam Dhale to ... aaj bhii suuraj Duub gayaa hai

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शाम ढले तो पंख पखेरू
लौट के घर आ जाए
जिनके साजन पास ना हो वो
असुअन दीप जलाए

आज भी सूरज डूब गया है
आज भी तुम नहीं आए
मन को झूठी आस दिलाके
ढल गए शाम के साए
आज भी सूरज डूब गया है
आज भी तुम नहीं आए

पल-पल सारी रैन गुज़ारूँ
छम-छम नीर बाहाके
हर आहट पर तुमको पुकारूँ
साजन मैं घबराके
कैसे-कैसे सपने मुझको
पागल मन दिखलाए
आज भी सूरज डूब गया है
आज भी तुम नहीं आए

जब-जब आए याद तुम्हारी
इक पल चैन ना पाऊँ
बंद ना होंगे नैन झरोखे
चाहे मैं मर जाऊँ
बैठी रहूँगी राह में यूँ ही
प्यासे नैन बिछाए
आज भी सूरज डूब गया है
आज भी तुम नहीं आए

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Pulkit Sharma
% Date: 21 Dec 2004
% Series: Noor-E-Tarannum
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