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shaam bhayii, ghanashyaam na aae

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शाम भयी, चनश्याम न आए - ३
सब के काम बनते फिरते - २
मुझ दुखिया के काम न आए
शाम भयी ...

तार मिलन के टूट गए क्यूँ - २
मुझसे मेरे रूठ गए क्यूँ
नगर-नगर वोह रहे घूमते
मेरे गोकुल गाम न आये
शाम भयी ...

पथ हेरत, पथरा गयी अँखियाँ - २
मुरझाई पलकों की पखियाँ
मैं बिरहन की ??? व्याकुल
जिसके राजा राम न आये
शाम भयी ...

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Rajiv Shridhar 
% Date: 10/29/1996
% Credits: Ashok Dhareshwar 
%          Vandana Venkatesan 
%          Balaji A.S. Murthy 
		     
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