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sau baar janam ... kyaa soch rahaa hai rudraa

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सौ बार जनम नहीं मिलता मिलता है एक बार ओ
रिश्ते खून के नहीं बनते बार बार
लुट जाए मिट जाए कट जाए इन्सां रिश्तों के लिए
क्या सोच रहा है रुद्रा दिखा प्रलय की मुद्रा
सौ बार जनम ...

आँख तीसरी खोल दे दुश्मन को ये बोल दे रुद्र रुद्र रुद्रा
क्रोध का ये तांडव है वो कौरव तू पांडव है
उड़ा दे दुश्मनों की निद्रा
हो क्या सोच रहा ...

ज़ुल्म को सहना ज़ुल्म है आज तेरा ये धर्म है
तेरे रक्त का जो कातिल है उसकी मौत तेरी मंज़िल है
वरदान शंकर का है नाम तेरा रुद्रा
क्या सोच रहा ...

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