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sa.nsaar se bhaage phirate ho

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सन्सार से भागे फिरते हो
भगवान को तुम क्या पाओगे
इस लोग को भी अपना ना सके
उस लोक में भी पछताओगे
सन्सार से भागे फिरते हो

( ये पाप है क्या ये पुण्य है क्या
रीतों पर धर्म की मोहरें हैं ) -२
रीतों पर धर्म की मोहरें हैं
हर युग में बदलते धर्मों को
कैसे आदर्श बनाओगे
सन्सार से भागे फिरते हो

( ये भोग भी एक तपस्या है
तुम त्याग के मारे क्या जानो ) -२
तुम त्याग के मारे क्या जानो
अपमान रचेता का होगा
रचना को अगर ठुकराओगे
सन्सार से भागे फिरते हो

( हम कहते हैं ये जग अपना है
तुम कहते हो झूठा सपना है ) -२
तुम कहते हो झूठा सपना है
हम जनम बिता कर जायेंगे
तुम जनम गँवा कर जाओगे

सन्सार से भागे फिरते हो
भगवान को तुम क्या पाओगे
सन्सार से भागे फिरते हो

Comments/Credits:

			 % Contributor: BOL ANAMOL #12084 [V S Rawat]
% Song courtesy: http://www.indianscreen.com (Late Shri Amarjit Singh)
		     
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