Browse songs by

samajhii thii ke ye ghar meraa hai

Back to: main index
View: Plain Text, हिंदी Unicode, image


समझी थी के ये घर मेरा है
मालूम हुआ मेहमान थी मैं
हो जिन्हें अपना-अपना कहती थी
हो उन सबके लिये अनजान थी मैं

इस तरह न मुझको ठुकराओ
इक बार गले से लग जाओ
हाय मैं अब भी तुम्हारी हूँ लोगों
रूठो न अगर नादान थी मैं

मेरा खोया हुआ बचपन ला दो मुझे
क्या दोष हुआ समझा दो मुझे
वो होंठ भी ना क्यूँ कहते हैं
जिन होंठों की मुस्कान थी मैं

तुम शाद रहो आबाद रहो
अब मैं तुम सबसे दूर चली
हाय परदेस बनी हैं वो गलियाँ
जिन गलियों की पहचान थी मैं

Comments/Credits:

			 % Song courtesy: http://www.indianscreen.com (Late Shri Amarjit Singh)
		     
View: Plain Text, हिंदी Unicode, image