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salaam\-e\-mohabbat ... kuchh aawaazo.n ke saaye

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को : सलाम-ए-मोहब्बत -३

कुछ आवाज़ों के साये
कुछ आवाज़ों के साये मेरी खोज में हैं
मैं इनसे भाग के जाऊँ कहाँ
मैं अपना आप छुपाऊँ कहाँ
कुछ आवाज़ों के साये

ये मेरे दिल की वीरानी
ये दर्द का गहरा सन्नाटा
झोँका भी चले तो शोर मचे
आँसू भी गिरे तो आये सदा
इस शोर मचाती वादी में
इस उजड़ी हुई आबादी में

कुछ आवाज़ों के साये
कुछ आवाज़ों के साये मेरी खोज में हैं
मैं इनसे भाग के जाऊँ कहाँ
मैं अपना आप छुपाऊँ कहाँ
कुछ आवाज़ों के साये

को : सलाम-ए-मोहब्बत -३

कल तक पाज़ेब छनकती थी
जिन रुकते भागते पाँवों की
अब क़ब्र बनी है आँखों में
उन जीते जागते ख़ाबों की
अब कोई सुहाना गीत नहीं
वो साज़ नहीं संगीत नहीं

कुछ आवाज़ों के साये
कुछ आवाज़ों के साये मेरी खोज में हैं
मैं इनसे भाग के जाऊँ कहाँ
मैं अपना आप छुपाऊँ कहाँ
कुछ आवाज़ों के साये -३

Comments/Credits:

			 % Song Courtesy: http://hindi-movies-songs.com/
% Credits: Khwaja Khurshid Anwar Trust
% 	Irfan Anwar ( anwar06 at msn dot com )
		     
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