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sajatii hai yuu.N hii mahafil

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सजती है यूँ ही महफ़िल
रंग यूँ ही ढलने दो
इक चराग़ बुझने दो
इक चराग़ जलने दो

साज़-ए-तमन्ना लाओ कोई गीत गाएँ हम
जश्न-ए-मुहब्बत है ये झूम के मनाएँ हम
शाम ये मुरादों की सुबह तक तो चलने दो

सजती है यूँ ही महफ़िल ...

अब तो नज़र भी अपनी उठती है दुआ बनकर
धड़कन भी निकली दिल से नग़मा-ए-वफ़ा बनकर
आज तो दिल-ओ-जाँ की हसरतें निकलने दो

सजती है यूँ ही महफ़िल ...

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Abhay Phadnis
% Date: 18 Sep 2003
% Series: Geetanjali
% generated using giitaayan
		     
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