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sadako.n utaariye ke naa laage kahii.n nazar

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सदकों उतारिये के ना लागे कहीं नज़र
सेहरे में आज फूल सा मुखड़ा है जलवागर

चेहरे से अपने आज तो परदा उठाइये - (२)
लिल्लाह मुझको चाँद सी सूरत दिखाइये

आंचल में मुँह छुपाके ना शरमाइये हुज़ूर
कुछ दिल कि बात कीजिये कुछ मुस्कुराइये
चेहरे ...

इतने करीब आके भी दिल को सुकून नहीं
जी चाहता है और भी नज़दीक आइये
चेहरे ...

आई है ज़िन्दगी में ये बेखुदी की रात
सब कुछ मोहब्बतों के सिवा भूल जाइये
चेहरे ...

चेहरे से अपने आज तो परदा उठाइये
लिल्लाह मुझको चाँद सी सूरत दिखाइये

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Ravi Kant Rai (rrai@plains.nodak.edu)
% Editor: Anurag Shankar (anurag@chandra.astro.indiana.edu)
		     
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