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saavaniyaa sa.njhaa me.n ambar jhar aa_ii

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सावनिया संझा में
सावनिया संझा में अम्बर झर आई
का चाल चलत कान, राधा भरमाई
सावनिया संझा में

लाग गई माथे में बूँदन की बिंदिया
राधा के रोम-रोम जूही खिल आई
सावनिया संझा में

जला का है बेला
जला का है बेला, या लपटों का मेला
मोरे पंग परस तरक न ही संजाई
सावनिया संझा में

बाजत घन म्रिदंग, बाजत घन म्रिदंग
बाजत घन म्रिदंग, गूँजत सब अंग अंग -२
राधा ने काया की बाँसुरी बजाई
सावनिया संझा में अम्बर झर आई
का चाल चलत कान, राधा भरमाई
सावनिया संझा में

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Rajiv Shridhar 
% Date: 01/27/1996
		     
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