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saavan ke jhuule pa.De tum chale aao

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सावन के झूले पड़े, (तुम चले आओ - ४)

आँचल ना छोड़े मेरा, पागल हुई है पवन
अब क्या करूं मैं जतन, धड़के जिया जैसे, पंछी उड़े

दिल ने पुकारा उन्हे, यादों के परदेस से
आती है जो देख के, हम उस डगर पे हैं कबसे खड़े

जब हम मिले पिया, तुम कितने नादान थे
हम कितने अन्जान थे, बाली उमरिया में, नैना लड़े

Comments/Credits:

			 % Credits: Raj Ganesan (raj@Everest.Tandem.COM)
%          Satish Subramaniam
%          Preetham Gopalaswamy (preetham@src.umd.edu)
		     
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