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saath ho tum aur raat javaa.N

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साथ हो तुम और रात जवाँ
नींद किसे अब चैन कहाँ
कुछ तो समझ ऐ भोले सनम
कहती है क्या नज़रों की ज़ुबाँ

महकती हवा, छलकती घटा
हमसे ये दिल, सम्भलता नहीं
की मिन्नतें, मनाकर थके
करें क्या ये अब तो, बहलाता नहीं
देख के तुमको, महकने लगा
लो बहकने लगा, हसरतों का जहाँ

हम इस राह पे, मिले इस तरह
के अब उम्र भर, न होंगे जुदा
मेरे साज़-ए-दिल की आवाज़ तुम
मैं कुछ भी नहीं तुम्हारे बिना
आओ चलें हम, जहाँ प्यार से
वो गले मिल रहे, हैं ज़मीं आस्मां

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Rajiv Shridhar (rajiv@hendrix.coe.neu.edu)
% Date: Fri Jan 1996
		     
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