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saaqii saaqii dil bujh hii gayaa hai siine me.n

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साक़ी साक़ी
दिल बुझ ही गया है सीने में
कुछ लुत्फ़ नहीं अब जीने में
साक़ी साक़ी

( साक़ी तेरे जाम वो जाम नहीं
क्या रखा है अब पीने में ) -२
साक़ी साक़ी

साक़ी पहली सी बात नहीं
पहले दिन पहली रात नहीं
जब तेरा ही वो हाथ नहीं -२
क्या रखा है फिर सीने में
साक़ी साक़ी

अब सावन के दिन बीत गये
हम हार गये तुम जीत गये
साक़ी जब छोड़ के मीत गये -२
कुछ लुत्फ़ नहीं फिर जीने में
साक़ी साक़ी

दिल बुझ ही गया है सीने में
कुछ लुत्फ़ नहीं अब जीने में
साक़ी साक़ी

Comments/Credits:

			 % Song courtesy: http://www.indianscreen.com (Late Shri Amarjit Singh)
		     
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