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saa.njh Dhale gagan tale ham kitane ekaakii

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सांझ ढले गगन तले
हम कितने एकाकी

सांझ ढले गगन तले
हम कितने एकाकी
छोड़ चले नैनो को
किरणों के पाखी

पथ की जाली से झाँक रही थीं कलियाँ - २
गंध भरी गुनगुन में मगन हुई थीं कलियाँ
इतने में टिमिर दस सपने ले नयनो में
कलियों के आँसुओं का कोई नहीं साथी
छोड चले नयनो को
किरणों के पाखी
सांझ ढले गगन तले ...

जुगनू का पट ओढ़े आयेगी रात अभी - २
निशिगंधा के सुर में कह देगी बात सभी
कपत है मन जैसे डाली अम्बवा की
छोड़ चले नयनो को
किरणों के पाखी
सांझ ढले गगन तले ...

Comments/Credits:

			 % Credits: Ramesh Hariharan (hariharn@phoenix.Princeton.EDU)
%          Raj Ganesan (cpd.tandem.com!raj)
%          Preetham Gopalaswamy (preetham@src.umd.edu)
% Editor: Anurag Shankar - still needs correct words (anurag@astro.indiana.edu)
		     
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