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raat ke pichhale paharo.n me.n

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रात के पिछले पहरों में
तुम क्या जानो हम क्यों रोए
रात के पिछले पहरों में

आँसू न थमे दुख सो न सका -२
थक हार के तारे भी सोए

बिरहा की घटाएँ ऐसी उठीं -२
बिन गरजे बादल बरस गए
ऐसे घनघोर अँधेरों में
हमने कितने मोती खोए

बेदर्दी तुम क्या समझोगे -२
क्या बीती थी अपने दिल पर
जब आग भरी बरसातों में
आँखों ने अंगारे बोए

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Arunabha S Roy
% Date: 14 Sep 2003
% Series: GEETanjali
% generated using giitaayan
		     
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