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raam kahi_e govi.nd kahi_e ... karam kii gati nyaarii

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(राम कहिए गोविंद कहिए)-३

करम की गति न्यारी संतों

बड़े बड़े नयन दिये मिरगन को
बन बन फिरत उघारी संतों

उज्जवल वरन दीन्ही बगलन को
कोयल कर दीन्ही कारी संतों

औरन दीपन जल निर्मल कीन्ही
सौंदर करती निखारी संतों

मूरख को तुम राज दियत हो
पण्डित फिरत भिखारी संतों

मीरा के प्रभु गिरिधर नागुन
राजाजी को कौन बिचारी संतों

Comments/Credits:

			 % Series: Sukhsaagar, Date: 17 march 2004
% Remarks: repetitions are omitted to retain poetic structure
		     
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