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qadamo.n me.n samaa ke paravaane

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क़दमों में समाके परवाने कभी हँसते हैं कभी रोते हैं
दामन से लिपटकर दीवाने कभी हँसते हैं कभी रोते हैं

बेख़ुदी का इक अन्दाज़ लिये आँखोन में सौ-सौ नाज़ लिये
कुछ नग़्मों की परवाज़ लिये
कुछ सोज़ लिये कुछ साज़ लिये
वो सुनकर इश्क़ के अफ़साने कभी हँसते हैं कभी रोते हैं

जज़्बात-ए-मस्ती डूब गई अश्कों में हँसी डूब गई
गो दिल की बस्ती डूब गई
साहिल पे कश्ती डूब गई
दीवाने मगर हैं दीवाने कभी हँसते हैं कभी रोते हैं

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			 % Date: 4 Feb 2004
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