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phuul khile aaye din bahaar ke

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फूल खिले आये दिन बहार के अब न कहीं जिया लागे
खुश्बू लिये आए दिन बहार के अब न कहीं जिया लागे

बुलबुल बन के पिया उड़ उड़ जाऊं
पंख लगा के तेरे अंगना में आऊं
फूल खिले आये दिन बहार के ...

जागूं सारी रात बिना छेड़े मुझे नींद आये न
आँखों में तेरे पिया कोई दूजा भाये न
पल पल तेरी मुझे याद सताए
जाने कब कैसे कहां दिन ढल जाए
होंठों पे है नाम तेरे अब कहीं चैन पाए न
फूल खिले आये दिन बहार के ...

आऊंगी तेरे पास मैं दूरियां सारे दिल की मिटाऊंगी
बैठूंगी तेरे सामने पलकों में अपने बसा लूंगी
तुझे रिझाऊंगी बिन्दिया लगा के मैं
लेके तुझे जाऊंगी मैं चुपके से छुपके
एक दिन मैं तेरी दुल्हन बनूंगी
तुझ पे मैं खुशियां लुटाऊंगी
फूल खिले आये दिन बहार के ...

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