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phir kahii.n koii phuul khilaa

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फिर कहीं कोई फूल खिला, चाहत ना कहो उसको - २
फिर कहीं कोई दीप जला, मंज़िल ना कहो उसको
फिर कहीं ...

मन का समुंदर प्यासा हुआ, क्यूँ किसी से माँगे दुआ - २
लहरों का लगा जो मेला, तूफ़ां ना कहो उसको
फिर कहीं ...

देखें सब वो सपने, खुद ही सजाए जो हमने - २
दिल उनसे बहल जाए तो, राहत ना कहो उसको
फिर कहीं ...

Comments/Credits:

			 % Credits: rec.music.indian.misc (USENET newsgroup) 
%          Prince Kohli (pkohli@cc.gatech.edu)
%          C.S. Sudarshana Bhat (ceindian@utacnvx.uta.edu)
%          Preetham Gopalaswamy (preetham@src.umd.edu)
% Editor: Anurag Shankar (anurag@astro.indiana.edu)
		     
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