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path bhuulaa ik aayaa musaafir

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पथ भूला इक आया मुसाफ़िर लेके मेरा मन दूर चला
बिखरे सपने रह गईं यादें रात से पहले चांद ढला

कोई न समझे कोई न जाने दिल की लगी है क्या
लाख छुपाओ छुप न सके ये प्रेम का रोग बुरा
पथ भूला इक आया ...

उसके आगे इन अँखियों ने दुख सौ बार कहा
पर वो नादाँ कुछ भी न समझा हाय रे भाग मेरा
पथ भूला इक आया ...

Comments/Credits:

			 % Credits: This lyrics were printed in Listeners' Bulletin Vol #116 under Geetanjali #106
		     
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