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pa.nkh hote to u.D aatii, rasiyaa o zaalimaa

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पंख होते तो उड़ आती, रसिया ओ ज़ालिमा
तुझे दिल का दाग़ दिखलाती

किरनें बन के बाहें फैलायी
आस के बादल पे जाके लहरायी
दूर से देखा मौसम हसीं था
आनेवाले तू ही नहीं था
रसिया ओ ज़ालिमा
तुझे दिल का दाग दिखलाती ...

यादों में खोयी पहुँची गगन में
पंछी बन के सच्ची लगन में
झूल चुकी मैं वादे का झूला
तू तो अपना वादा ही भूला
रसिया ओ ज़ालिमा
तुझे दिल का दाग दिखलाती ...

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Arati Deo (arati@rice.edu)
		     
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