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o niile parbato.n kii dhaaraa

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ओ नीले पर्बतों की धारा
आयी ढूँढने किनारा बड़ी दूर से
सब को सहारा चाहिये
कोई हमारा चाहिये

फूल में जैसे फूल की खुशबू
दिल में है यूँ तेरा बसेरा
धरती से अम्बर तक फैला
चाहत की बाहों का घेरा
ओ नीले पर्बतों की धारा ...

सूरज पीछे घूमे धरती
साँझ के पीछे घूमे सवेरा
जिस नाते ने इन को बाँधे
वो नाता है तेरा मेरा
ओ नीले पर्बतों की धारा ...

Comments/Credits:

			 % Transliterator: K Vijay Kumar
		     
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