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o kR^ishn kanhaa_ii aashaa_o.n kii duniyaa me.n

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ओ कृश्न कन्हाई -४
आशाओं की दुनिया में है क्यूँ आग लगाई
ओ कृश्न कन्हाई -२

( क्या ऊँच-नीच तेरे यहाँ पर भी भगवान
ऐसा नहीं तो क्यूँ है ये संसार में तूफ़ान ) -२
पीने को है तैयार लहू भाई का भाई
ओ कृश्न कन्हाई -२

दुनिया के भेद-भाव को भगवान मिटा दे
भगवान मिटा दे
बिछड़े हुओं को फिर से एक बार मिला दे
एक बार मिला दे
गोपाल मेरे -२
गोपाल मेरे क़ैद से दे-दे तू रिहाई

आशाओं की दुनिया में है क्यूँ आग लगाई
ओ कृश्न कन्हाई -२

निरधन को ये धनवान समझते नहीं इंसान
माया के पुजारी बने ख़ुद बैठे हैं भगवान
इंसाफ़ न करना था तो क्यूँ दुनिया बसाई -२
ओ कृश्न कन्हाई
कृश्न कन्हाई
आशाओं की दुनिया में है क्यूँ आग लगाई
ओ कृश्न कन्हाई -२

Comments/Credits:

			 % Song courtesy: http://www.indianscreen.com (Late Shri Amarjit Singh)
		     
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