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o jisakaa saathii hai bhagavaan

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ओ जिसका साथी है भगवान
उसको क्या रोकेगा आँधी और तूफ़ान

गगन चूर हो जाए ज़मीं चाहे धरती में धंस जाए
तूफ़ानों की गोद में चाहे सारा जग खो जाए
पाँव न रुकने पाए
ओ जिसका साथी ...

जिसके शीश पे हाथ हज़ारों छू ना कोई पाएगा
हरि नाम से पर्वत तिनका बन जाएगा
धूल में मिल जाएगा
ओ जिसका साथी ...

भक्त-हरि का बन्धन तो ज्यों दीपक और बाती
उसी ज्योति से ये जलती है उसमें ही मिल जाती
देह अमर
ओ जिसका साथी ...

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