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o babu_aa yah mahu_aa

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ओ बबुआ यह महुआ महकने लगा है
आ मेरे साँस जलते हैं
बदन में साँप चलते हैं
तेरे बिना
त रा रा त र रा त र रा

शाम सुलगती है जब भी तेरा ख़याल आत है
सूनी सी गोरी बाहों में धुँ_आ सा भर जात है
बर्फ़ीला रास्ता कटता नहीं
ज़हरीला चाँद भी हटता नहीं
तेरे बिना ...

खोयी हुई सी आँखों से चादर उतर जाती है
झुलसी हुई रह जाती हूँ रात गुज़र जाती है
ऐसे में तुम कभी देखो अगर
काटा है किस तरह शब का सफ़र
तेरे बिना ...

ओ बबुआ यह महुआ महकने लगा है ...

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Arunabha S. Roy
% Date: Nov 21, 2002
% generated using giitaayan
		     
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