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nuktaachii.n hai Gam\-e\-dil usako sunaaye na bane - Mirzaa Ghaalib

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आ आ आ

नुक्ताचीं है, ग़म-ए-दिल उसको सुनाये न बने
उसको सुनाये न बने
क्या बने बात जहाँ बात बनाये न बने
नुक्ताचीं है, ग़म-ए-दिल

ग़ैर फिरता है लिये यूँ तेरे ख़त को के अगर
कोई पूछे के ये क्या है तो छुपाये न बने
नुक्ताचीं है, ग़म-ए-दिल

मैं बुलाता तो हूँ उसको मगर ऐ जज़्बा-ए-दिल
उस पे बन जाये कुछ ऐसी कि बिन आये न बने -२
नुक्ताचीं है, ग़म-ए-दिल

इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश ग़ालिब -२
कि लगाये न लगे और बुझाये न बने
नुक्ताचीं है, ग़म-ए-दिल उसको सुनाये न बने

Comments/Credits:

			 % Song courtesy: http://www.indianscreen.com (Late Shri Amarjit Singh)
% Credits: U.V. Ravindra
		     
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