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niilam ke nabh chhaa_ii pukharaajii jhaa.Nkii

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ल: हूँ
नीलम के नभ छाई पुखराजी झाँकी
मेरे तो नैनों में किरणों के पाखी
पाती की गोदी में सोई थी एक कली

अ: कैसे सोई होगी कली
जैसे सोई मेरी लली
कली हिली
ल: ऊँ हूँ
अ: कली डुली
ल: ना-ना
घुली-घुली बैंजनिया सपनों में एक कली
इतने में मोर-पंख परस हुआ

घुली-घुली बैंजनिया सपनों में एक कली
इतने में मोर-पंख परस हुआ

अ: कहाँ-कहाँ पे छुआ री
जरा इसे तो बता री
गालों पर
ल: ऊँ हूँ
अ: बालों पर
ल: ना-ना
इतने में मोर-पंख परस हुआ पलकों पर
जादू से फूल बनी इक कली चम्पा की
को: सच इसके नैनों में किरणों के पाखी -२

ल: चम्पा के पाँवों में घुँघरू उग आये -२
अ: टहनी ने ताल दिया
थिरक-थिरक लहराये
ल: भँवरे का गंध-गीत सात सुरों वाला
को: हूँ हूँ हूँ
संत आने का होश किसे बाकी
को: हम सबके नैनों में किरणों के पाखी -३

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