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naa mai.n la.Dii thii shyaam nikas gaye

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ना मैं लड़ी थी श्याम निकस गये ||स्थायी||

ना मैं बोली ना मैं चाली -२
तान दुपटड़ा सोई पड़ी थी
तान दुपटड़ा मैं सोई पड़ी थी
श्याम निकस गये ||१||

पाँच सखी मोरी संग की सहेली -२
इनसे पूछो मैं कुछ ना कही थी
इनसे पूछो मैं कुछ ना कही थी
श्याम निकस गये ||२||

दस दरवाज़े बंद कर सोयी -२
ना जानूँ कोई खिड़की खुली थी
ना जानूँ कोई खिड़की खुली थी
श्याम निकस गये ||३||

कहत कमाली कबीर की बेटी -२
इस ब्याही से तो कुँवारी भली थी
इस ब्याही से तो कुँवारी भली थी
श्याम निकस गये ||४||

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Vinay P Jain
% Date: 10 Sep 2004
% Series: Sugam Sangeet
% generated using giitaayan
		     
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