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na tel aur na baatii, na kaabuu havaa par

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न तेल और न बाती न काबू हवा पर
दिये क्यों जलाये चला जा रहा है

उजालों को तेरे सियाही ने घेरा
निगल जायेगा रोशनि को अन्धेरा
चिरगों की लौ पर धुआँ चा रहा है
दिये क्यों जलाये चला जा रहा है
न तेल और ...

न दे दोश भगवान को भोले भाले
खुशी की तमन्ना में ग़म तूने पाले
तू अपने किये की सज़ा पा रहा है
दिये क्यों जलाये चला जा रहा है
न तेल और ...

तेरे भूल पर कल यह दुनिया हँसेगी
निशानी हर इक दाग़ बनकर रहेगी
तू भरने की खातिर मिटा जा रहा है
दिये क्यों जलाये चला जा रहा है
न तेल और ...

Comments/Credits:

			 % Transliterator: K Vijay Kumar
% Comments: A Tribute to Sachin Dev Burman #7
		     
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