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mohan kii muraliyaa baaje

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( मोहन की मुरलिया बाजे,
हो सुन ठेस जिया पे मोरे लागे ) -२

दूर कोई मुरली की धुन पर गीत मिलन के गाये
जाने वाले याद में तेरी नींद न मुझको आये
जब चैन से दुनिया सोये
हो एक बिरहा तमर मन ?? जागे

मोहन की मुरलिया बाजे,
हो सुन ठेस जिया पे मोरे लागे

रात कहे धरती पर जग-मग चाँदनी बन कर बरसूँ
ऐसे में आ के दरस दिखा जा हाय मैं रो-रो तरसूँ
दिल तोड़ के जाने वाले
हो मोहे कुछ नहीं तुझ बिन साजे

मोहन की मुरलिया बाजे,
हो सुन ठेस जिया पे मोरे लागे

लुटीं बहारें सावन बीता टूट गये वो सपने
जब से पिया परदेस सिधारे रहे न दिन वो अपने
हाय बिरहा के बादल काले
हो छाया घोर अंधेरा मोरे आगे

मोहन की मुरलिया बाजे,
हो सुन ठेस जिया पे मोरे लागे

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