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merii jaan na zulfe.n kholo kahii.n raat Thahar naa jaa_e

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मेरी जान
मेरी जान न ज़ुल्फ़ें खोलो कहीं रात ठहर ना जाए -२

बेताब हवाएँ ऐसे में ख़ुश्बू न उड़ा लें बालों की
खिलती हुई कलियाँ चुपके से रंगत ना चुरा लें गालों की
ये रंग कहीं बँट जाए ना ये हुस्न बिखर ना जाए
मेरी जान न ज़ुल्फ़ें ...

इस फूल सी नाज़ुक बाँहों से हर शाख लचकना सीख न ले
यूँ जान के गहरी साँस न लो हर मौझ छलकना सीख न ले
लहरा के तुम्हारे आँचल तक हर शोख़ नज़र ना जाए
मेरी जान न ज़ुल्फ़ें ...

तुम यूँ ही क़यामत लगती हो अब और अदाएँ जाने दो
माथे पे ये बल क्यों डाले हैं ये दर्ज़ा सज़ाएँ जाने दो
इतना भी किसी से रूठो ना कोई जाँ से गुज़र ना जाए
मेरी जान न ज़ुल्फ़ें ...

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