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mere mahabuub qayaamat hogii

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मेरे महबूब क़यामत होगी
आज रुसवा तेरी गलियों में मुहब्बत होगी

नाम निकलेगा तेरे ही लब से
जान जब इस दिल-ए-नादान से रुखसत होगी
मेरे महबूब ...

तेरी गली मैं आता सनम
नग़मे वफ़ा के गाता सनम
तुझ से सुना ना जाता सनम
अब आ पहुंचा आया हूँ मगर
ये कह कर मैं दीवाना
ख़त्म अब आज ये वहशत होगी
आज रुसवा ...

मेरे सनम के दर से अगर
बद-ए-सबा हो तेरा गुज़र
कहना सितमगर कुछ है खबर
तेरा नाम लिया
जब तक भी जिया
ऐ शम्मा तेरा परवाना
जिससे अब तक तुझे नफ़रत होगी
आज रुसवा ...

मेरे महबूब ...

Comments/Credits:

			 % Credits: C. S. Sudarshana Bhat (cesaa129@utacnvx.uta.edu)
%          Venkatasubramanian K Gopalakrishnan (gopala@cs.wisc.edu)
%          Preetham Gopalaswamy (preetham@src.umd.edu)
% Editor: Anurag Shankar - needs correct words (anurag@astro.indiana.edu)
		     
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