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man dhiire dhiire gaaye re

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मन धीरे धीरे गाये रे
मालूम नहीं क्यों
बिन गाये रहा न जाये रे
मालूम नहीं क्यों

पलकों में छुपा कर गोरी
लाई है मिलन की डोरी
अब साथ है जीवन भर का
लो थाम लो बैंया मोरी
इक बात ज़ुबाँ पर आये रे
मालूम नहीं क्यों

आशाओं ने ली अंगड़ाई
तन मन में बजी शहनाई
दिल डूब गया मस्ती में
इक लहर खुशी की छाई
दिल हाथ से निकला जाये रे
मालूम नहीं क्यों

Comments/Credits:

			 % Transliterator: K Vijay Kumar
		     
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