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mai.n jaaguu.N saarii rain sajan tum sao jaao

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मैं जागूँ सारी रैन
सजन तुम सो जाओ, सो जाओ, सो जाओ
गीतों में छुपा लूँ बैन
सजन तुम सो जाओ, सो जाओ, सो जाओ

साँझ ढले से भोर भये तक
जाग के जब कटती हैं घड़ियां
मधुर मिलन की गोद मेइन बस कर
खिलती हैं जब जीवन लड़ियां
आज नहीं वो रैन
हो आज नहीं वो रैन
सजन तुम सो जाओ ...

फीकी पड़ गई चाँद की ज्योति
धुँधले हो गए दीप गगन के
सो गईं सुंदर सेज की कलियाँ
सो गए खिलते भाग दुल्हन के
खुलकर रो लें नैन, सजन तुम सो जाओ ...

जाग के सो गई तन की अग्नि
बढ़कर थम गई मन की हलचल
अपना घूँघट आप उलटकर
खोल दी मैंने पाँव की छागल
अब है चैन ही चैन, सजन तुम सो जाओ ...

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Arunabha S Roy
% Date: 3 Jan 2005
% Series: LATAnjali
% Credits: Satish Kalra (submitted first stanza)
% generated using giitaayan
		     
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