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maanaa mere hasii.n sanam, tuu rashq\-e\-maahataab hai

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माना मेरे हसीं सनम, तू रश्क़-ए-माहताब है
पर तू है लाजवाब तो, मेरा कहाँ जवाब है

हैरत से यूँ न देखिये, ज़र्रा हुआ तो क्या हुआ -२
ज़र्रा हुआ तो क्या हुआ
अपनी जगह पे जान-ए-मन, ज़र्रा भी आफ़ताब है

तेरे शबाब का सुरूर छाया जो दो जहाँ पर -२
छाया जो दो जहाँ पर
मेरी निगाह-ए-शौक़ से आया वो इनक़लाब है

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Rajiv Shridhar (rajiv@hendrix.coe.neu.edu)
% Date: Thu Jan 18, 1996
% Credits: Preetham Gopalaswamy (preetham@connectinc.com)
% Editor: Rajiv Shridhar (rajiv@hendrix.coe.neu.edu)
		     
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