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lapak jhapak tuu aa re badaravaa

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लपक जपक तू आ रे बदरवा
सर की खेती सूख रही है
बरस बरस तू आ रे बदरवा

झगड़ झगड़ कर पानी ला तू
अकड़ अकड़ बिजली चमका तू
तेरे घड़े में पानी नहीं तो
पनघट से भर ला
रे बदरवा ...

बन में कोयल कूक उठी है
सब के मन में हूक उठी है
भूदल से तू बाल उगा दे
झट पट तू बरसा
रे बदरवा ...

Comments/Credits:

			 % Transliterator: K Vijay Kumar
		     
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