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laharo.n pe lahar, ulfat hai javaa.n

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लहरों पे लहर, उल्फ़त है जवां
रातों की सहर, चली आओ यहाँ
सितारे टिमटिमाते हैं, तू आजा आजा
मचलती जा रही है ये हवाएं आजा आजा
लहरों पे लहर, उल्फ़त है जवां ...

सुलगती चाँदनी में थम रही है तुझ पे नजर
कदम ये किस तरफ़ बढ़ते चले जाते हैं बेखबर
ज़माने को है भूले हम अजब सी ख्वाब ये सफ़र
लहरों पे लहर, उल्फ़त है जवान ...

ना जाने कौनसी राहें हमारा कौन सा है जहान
सहारे किसके हम ढूँढे, हमारी मंजिल है कहाँ
सदा दिल की मगर कहती है मेरी दुनिया है यहाँ
लहरों पे लहर, उल्फ़त है जवां ...

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Ravi Kant Rai (rrai@plains.nodak.edu)
% Editor: Anurag Shankar (anurag@chandra.astro.indiana.edu)
		     
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