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kyaa kahaa ... shiishii bharii gulaab kii

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क्या कहा तुझे मैं भूल जाऊँ
न तुझे याद करूँ न तुझे याद आऊँ

शीशी भरी गुलाब की पत्थर पे तोड़ दूँ -२
तेरी गली न छोड़ूँ
तेरी गली न छोड़ूँ दुनिया मैं छोड़ दूँ -२
साँसों की डोर से पिया माला का काम लूँ -२
करके बहाना राम का
करके बहाना राम का तेरा मैं नाम लूँ -२
शीशी भरी गुलाब की पत्थर पे तोड़ दूँ

( प्रेम है ये कोई खेल नहीं
ये कोई दो दिलों का सैयाँ मेल नहीं ) -२
जा काँटा चुभा हो पाँव में दूँ मैं निकाल वो
काँटा चुभा हो पाँव में दूँ मैं निकाल वो
कैसे निकालूँ दिल से मैं तेरे ख़याल को -२

भूला तू करके वादे पीपल की छाँव में -२
तुझसा नहीं है कोई
तुझसा नहीं है कोई हरजाई गाँव में -२
शीशी भरी गुलाब की पत्थर पे तोड़ दूँ

( छोड़ दे मेरा हाथ चन्ना
ना मजाक करे मेरे साथ चन्ना ) -२
मैं कलियाँ भरी बहार की बागों से नोंच लूँ
कलियाँ भरी बहार की बागों से नोंच लूँ
फिर हाँ करूँगी बालमा पहले मैं सोच लूँ -२

देखा हँसा दिया तुझे हो तांगे वाले यार -२
रूठा हुआ था माहिया
रूठा हुआ था माहिया मैंने मना लिया -२
शीशी भरी गुलाब की पत्थर पे तोड़ दूँ
पत्थर पे तोड़ दूँ -२

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