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kRRiShN hari hari kRRiShN manohar

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(कृष्ण हरि हरि कृष्ण मनोहर)-३
भजते नर उर धारी रे
(कृष्ण हरि हरि कृष्ण मनोहर)-३

(शेष शारदा पार ना पावें)-२
निगम कहत ॐ कारी रे
(तेहि घनश्याम को सुमिरन करि ले)-२
मिटहीं भव दुख भारी रे
कृष्ण हरि हरि कृष्ण मनोहर ...

(सुंदर श्रीघनश्याम सदाई)-२
शरणागत सुखकारी रे
(एहि छबि अंतर मे धरि ले)-२
देत गर्भदुख टारी रे
कृष्ण हरि हरि कृष्ण मनोहर ...

(अधम उद्धार पतित के पावन)-२
भक्तवच्छल भयहारी रे
(ऐसे हरि सुखकारी बिसारत )-२
सो नर होत कु वारी रे
कृष्ण हरि हरि कृष्ण मनोहर ...

(जेहि जन आई रहे इन शरने)-२
हो गए भवजल पारी रे
(अवध प्रसादनाथ की छबि पे)-२
बारंबार बलिहारी रे
कृष्ण हरि हरि कृष्ण मनोहर ...

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			 % Series: Sukhsaagar, Date: 24 Jan 2004
		     
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