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koii to sune mere Gam kaa fasaanaa

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कोई तो सुने मेरे ग़म का फ़साना
कहीं मार डाले न ज़ालिम ज़माना

क़फ़स में ऐ बुलबुल तू जी भर के रो ले
चमन में तेरा जल गया आशियाना
कहीं मार डाले न ...

क़सम है तुम्हें मेरी बरबादियों की
मेरी मौत पर भी न आँसू बहाना
कहीं मार डाले न ...

Comments/Credits:

			 % Transliterator: K Vijay Kumar
		     
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