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kisii kii yaad me.n duniyaa ko hai.n bhulaaye huye

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किसी की याद में दुनिया को हैं भुलाये हुये
ज़माना गुज़रा है अपना ख़्हयाल आअये हुये

बड़ी अजीब ख़्हुशी है ग़म-ए-मुहब्बत भी
हँसी लबों पे मगर दिल पे चोट खाये हुये

हज़ार पर्दे हों पहरें हों या हों दीवारें
रहेंगे मेरी नज़र में तो वो समाये हुये

किसी के हुस्न की बस इक किरण ही काफ़ी है
ये लोग क्यूँ मेरे आगे हैं शम्मा लाये हुये

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			 % Transliterator: Nita Awatramani
		     
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