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kis kisako diipak pyaar kare

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किस किसको दीपक प्यार करे
जब लाख पतंगे जलते हों
क्यों फूल धूल में मिल जाएँ
जब भँवरे आहें भरते हों

चन्दा का इसमें दोष ही क्या
तारे रोएँ या मुस्काएँ
चाहे ओस बने उनके आँसू
या मोती बनकर झर जाएँ
क्यों खिले कँवल कुम्हला जाएँ
जब मरने वाले मरते हों

जोगी तुम जोग रमा बैठे
अपने में ध्यान लगा बैठे
ऐसों से प्यार की क्या आशा
जो अपना आप गँवा बैठे
फिर भी तुम को ही चाहेंगे
हम जीते हों या मरते हों

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Arunabha S Roy
% Date: 16 Sep 2003
% Series: LATAnjali
% generated using giitaayan
		     
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