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ketakii gulaab juuhii champakaban phuule

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केतकी गुलाब जूही चम्पकबन फूले -२
रितु बसन्त अपनो कन्त, गोदी गरवा लगाय
झुलना में बैठ आज पी के संग झूले
केतकी गुलाब जूही चम्पकबन फूले

गल-गल कूँज-कूँज, गुन-गुन भँवरों की गूँज
राग-रंग अंग-अंग छेड़त रसिया अनंग
कूयल की पंचम सुन दुनिया दुख भूले, भूले, भूले
केतकी गुलाब जूही चम्पकबन फूले
केतकी गुलाब जूही
केतकी गुलाब जूही चम्पकबन फूले -२

केतकी गुलाब जूही चम्पकबन फूले -२
रितु बसन्त अपनो कन्त, गोदी गरवा लगाय
झुलना में बैठ आज पी के संग झूले
पी के संग झूले
केतकी गुलाब जूही चम्पकबन फूले

मधुर-मधुर थोरी-थोरी, मीठी बतियों से गोरी
मधुर-मधुर थोरी-थोरी
मधुर-मधुर थोरी-थोरी, मीठी बतियों से गोरी
चित चुराये हँसत जाय -२
चोरी कर सिर झुकाये
सीश झुकाये चंचल लट
गालन को छू ले -२
केतकी गुलाब जूही चम्पकबन फूले -२
केतकी गुलाब जूही

केतकी गुलाब जूही

केतकी गुलाब जूही
केतकी
केतकी
केतकी

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