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kaTatii hai ab to zi.ndagii marane ke i.ntazaar me.n

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कटती है अब तो ज़िंदगी मरने की इंतज़ार में
अब न ख़िज़ा में कोई ग़म, अब न खुशी बहार में
कटती है अब तो ज़िंदगी ...

क्या क्या फ़रेब खाये हैं क्या क्या सितम उठाये हैं
हम तो कहीं के न रहे हाय! किसी के प्यार में
कटती है अब तो ज़िंदगी ...

देखी थी हमने भी बहार, हम भी हँसे थे एक बार
कितना क़रार था कभी इस दिल-ए-बेक़रार में
कटती है अब तो ज़िंदगी ...

Comments/Credits:

			 % Transliterator: K Vijay Kumar
		     
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