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kaise kahuu.N tujhase jiyaa kii mai.n batiyaa.N

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कैसे कहूँ, कैसे कहूँ, तुझसे जिया की मैं बतियाँ
शर्माए मन तोरे आगे, मोरी लाजों में खो जाएँ अँखियाँ

जब-जब तेरे पास आऊँ नैन मिलते ही सुध-बुध गँवाऊँ -२
रह-रहके दिल मेरा धड़के पिया मैं तुझसे कुछ कह न पाऊँ
मैं तुझसे कुछ कह न पाऊँ, मोरी लागी न जाने तू सैयाँ

बलमा नहीं तुझसे दूरी फिर भी आशा नहीं होती पूरी -२
ऐसा है कुछ हाल दिल का जैसे छाए बहारें अधूरी
छाए बहारें अधूरी, जैसे खिलने से रुक जाए कलियाँ

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Arunabha S Roy
% Date: 17 Oct 2003
% Series: LATAnjali
% generated using giitaayan
		     
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