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kahaa.N hai kahaa.N hai kanhayyaa

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कहाँ है कहाँ है कन्हैया -२
समझे न प्यार मेरा -२
मीठी-मीठी बाँसुरी से छीन ले क़रार मेरा -२
कहाँ है कहाँ ...

ओ मोहे रतियाँ जगाए वो मेरी निंदिया चुराए
ढूँढूँ मैं शाम-सवेरे वो मोहे मिलने न पाए
कहाँ है कहाँ ...

मैं उनकी भोली पुजारन हूँ पागल उनके कारन
दो नैना लागे पिऊ से बनी मैं प्यार की जोगन -२
कहाँ है कहाँ ...

मैं जीवन ऐसे गुज़ारूँ कि बैठी पंथ निहारूँ
मैं उनके साँस की सरगम तेरा ही नाम पुकारूँ
कहाँ है कहाँ ...

Comments/Credits:

			 % Credits: Ashok Dhareshwar
		     
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