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kabiraa nirbhay raam jape ... mahafil me.n terii yuu.N hii rahe

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आ : कबिरा निर्भय राम जप
जब लगदी में बाति (?)
तेल घटा बाती बुझी
सोवेगा दिन-राति

र : महफ़िल में तेरी यूँ ही रहे
जश-ए-चराग़ाँ
आँखों में ही ये रात
ग़ुज़र जाये तो अच्छा

आ : साच बराबर तप नहीं
झूठ बराबर पाप
जा के हिरदय साच है
ता के हिरदय आप

र : जा कर तेरी महफ़िल से
कहाँ चैन मिलेगा
अब अपनी जगह अपनी
ख़बर जाये तो अच्छा

आ : जब मैं था तब हरि नहीं
अब हरि है मैं नाहीं
सब अंधियारा मिट गया
जब दीपक देखा माहिं

र : जिस सुबह की तक़दीर में
लिखी हो जुदाई
उस सुबह से पहले
कोई मर जाये तो अच्छा -२

Comments/Credits:

			 % Song courtesy: http://www.indianscreen.com (Late Shri Amarjit Singh)
		     
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