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kab ke bichha.De hu_e ham aaj kahaa.N aa ke mile

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कि : कबके बिछड़े हुए हम आज कहाँ आ के मिले
आ : जैसे शम्मा से कहीं लौ ये झिलमिला के मिले
कि : कबके बिछड़े ...
आ : ( जैसे सावन ) -३ से कहीं प्यासी घटा आ के मिले
दो : कबके बिछड़े ...

आ : बाद मुद्दत के रात महकी है
कि : दिल धड़कता है साँस बहकी है
आ : प्यार छलका है प्यासी आँखों से
सुर्ख़ होंठों पे आग दहकी है
ओ महकी हवाओं में बहकी फ़िज़ाओं में दो प्यासे दिल यूँ मिले -२
कि : ( जैसे मयकश ) -३ कोई साक़ी से डगमगा के मिले
दो : ( कबके बिछड़े ) -३ हुए ...

आ : दूर शहनाई गीत गाती है
कि : दिल के तारों को छेड़ जाती है -२
आ : यूँ सपनों के फूल यहाँ खिलते हैं
यूँ दुआ दिल की रंग लाती है -२
कि : बरसों के बेगाने उल्फ़त के दीवाने अनजाने ऐसे मिले -२
आ : ( जैसे मनचाही ) -३ दुआ बरसों आजमा के मिले
कि : कबके बिछड़े ...
आ : जैसे सावन ...
दो : कबके बिछड़े ...

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