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kab biit gayii jiivan kii subah

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कब बीत गयी जीवन की सुबह
ये जान न मैं तो पाई रे
बुझ गये दीप आशाओं के
ये कैसी आँधी आई रे -२
कब बीत गयी

दुनिया ने मेरा दुनिया में
सुख चैन है मुझसे छीन लिया -२
क़िसमत ने खुशी की कलियों को
है मन उपवन से बीन लिया -२
अब किसको पुकारूँ सुनता नहीं
दुखिया की कोई दुहाई रे -२
कब बीत गयी

जब लाखों थे सुननेवाले
तब कहने को थी बात नहीं -२
अब लाखों बातें कहनी है
और सुननेवाला साथ नहीं -२
मैं पूछूँ किसे जाकर के प्रभु -२
ये किसने आग लगाई रे -२
कब बीत गयी

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Hrishi Dixit
% Date: 6 Apr 2001
% Comments: Latanjali series
		     
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