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kaam jahaa.n me.n kyaa\-kyaa hote din\-dahaa.De

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कु : काम जहां में क्या-क्या होते -२
को : दिन-दहाड़े ३
कु : खेल तमाशे क्या क्या होते -४
को : आ आ आ
दिन-दहाड़े ३

कु : कैसा नाज़ुक दौर है देखो -२
पहरेदार भी चोर है देखो -२
उजले उजले भेष में बन्दे
घूँघट खोलो तो ये नंगे
हुस्न यहाँ पर लुटते रहते -३
को : आ आ आ
दिन-दहाड़े ३

कु : ऊँचे ऊँचे महलों वाले -२
कितने नीचे गिरते जाएं
बागडोर है हाथ में इनके
जिसको चाहे उसे नचाएं
चीख किसी की सुनी न जाए -३
को : आ आ आ
दिन-दहाड़े ३

कु : कुल धरती शमशान बनी है -२
ज़ुल्मों का तूफ़ान बनी है
गांधी तिलक जवाहर भगत सिंह
कब तक ये सब कटते रहेंगे
ईसा सूली चढ़ाए जाते -३
को : आ आ आ
दिन-दहाड़े ३

कु : तू चुप क्यों है ऊपर वाले
अरे तू क्यों चुप है ऊपर वाले
अब ये दुनिया कौन सम्भाले
एक पल तू धरती पे आ जा
चक्र सुदर्शन यहाँ चला जा
बर्बादी के सावन देखे -३
को : आ आ आ
दिन-दहाड़े ३
काम जहां में ...

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