Browse songs by

jin raato.n me.n nii.nd u.D jaatii hai

Back to: main index
View: Plain Text, हिंदी Unicode, image


जिन रातों में नींद उड़ जाती है, क्या कहर की रातें होती हैं
दरवाजों से टकरा जाते हैं, दीवारों से बातें होती हैं

घिरघिर के जो बदल आते हैं और बिन बरसे खुल जाते हैं
आशाओं की झूठी दुनिया में सूखी बरसातें होती है

जब वो नहीं होते पहलू में और लम्बी रातें होती है
याद आके सताती रहती है और दिल से बातें होती हैं

हँसाने में जो आँसू आते हैं, दो तस्वीरें दिखलाते हैं
हर रोज जनाजे उठाते हैं, हर रोज बारातें होती है

हिम्मत किसकी है जो पुछ सके ये आरजु-ए-सौदाई से
क्यूँ साहिब आखिर अकेले में ये किससे बातें होती हैं

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Ravi Kant Rai (rrai@plains.nodak.edu)
% Editor: Anurag Shankar (anurag@astro.indiana.edu)
		     
View: Plain Text, हिंदी Unicode, image